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बार-बार थकान और सुस्ती को न समझें सामान्य, हो सकता है इस बीमारी का संकेत

सुबह उठते ही थकान, दिनभर सुस्ती, वजन में लगातार बदलाव या बिना वजह चिड़चिड़ापन—इन लक्षणों को अक्सर लोग सामान्य कमजोरी या तनाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर ये परेशानियां लंबे समय से बनी हुई हैं और रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डाल रही हैं, तो इनके पीछे थायरॉइड हार्मोन का असंतुलन भी एक कारण हो सकता है।

थायरॉइड गर्दन के आगे मौजूद एक छोटी-सी ग्रंथि है, जो शरीर के मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा के इस्तेमाल और कई महत्वपूर्ण शारीरिक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने में भूमिका निभाती है। जब यह ग्रंथि जरूरत से कम हार्मोन बनाती है तो हाइपोथायरॉइडिज्म, जबकि ज्यादा हार्मोन बनने की स्थिति को हाइपरथायरॉइडिज्म कहा जाता है।

हर व्यक्ति में लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं और केवल किसी एक लक्षण के आधार पर थायरॉइड की समस्या की पुष्टि नहीं की जा सकती। फिर भी कुछ संकेत ऐसे हैं, जिन्हें लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

लगातार थकान और शरीर में सुस्ती

पर्याप्त नींद लेने के बावजूद अगर सुबह उठने के बाद भी थकावट महसूस होती है या दिनभर ऊर्जा की कमी रहती है, तो इस पर ध्यान देना जरूरी है। हाइपोथायरॉइडिज्म में थकान और सुस्ती आम लक्षणों में शामिल हो सकते हैं।

अगर इसके साथ वजन बढ़ना, ठंड ज्यादा लगना, कब्ज, त्वचा का रूखापन या बाल झड़ने जैसी समस्याएं भी लगातार बनी हुई हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेकर जांच कराने पर विचार किया जा सकता है।

वजन में लगातार बदलाव

बिना खानपान या व्यायाम में बड़े बदलाव के वजन बढ़ना भी थायरॉइड की गड़बड़ी से जुड़ा हो सकता है। हाइपोथायरॉइडिज्म में थायरॉइड हार्मोन कम बनने के कारण शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो सकता है, जिससे वजन बढ़ने की समस्या सामने आ सकती है।

वहीं, थायरॉइड के ज्यादा सक्रिय होने पर कुछ लोगों का वजन बिना प्रयास के कम भी हो सकता है। हालांकि वजन में बदलाव के पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं, इसलिए केवल वजन के आधार पर थायरॉइड की समस्या मान लेना सही नहीं है।

बेचैनी और चिड़चिड़ापन

मूड में बदलाव, बेचैनी या लगातार चिड़चिड़ापन भी कई बार हार्मोनल बदलावों से जुड़ा हो सकता है। हाइपरथायरॉइडिज्म में बेचैनी के साथ हाथ कांपना, दिल की धड़कन तेज होना, ज्यादा पसीना आना और नींद में परेशानी जैसी शिकायतें हो सकती हैं।

हालांकि तनाव, चिंता और नींद की कमी भी ऐसे लक्षण पैदा कर सकते हैं। इसलिए लक्षणों के समूह और उनकी अवधि को ध्यान में रखना जरूरी है।

बाल और त्वचा में बदलाव

अगर बाल पहले की तुलना में अधिक झड़ने लगे हैं, त्वचा लगातार रूखी रहती है या शरीर में सामान्य से अधिक सूखापन महसूस होता है, तो इसके कई कारण हो सकते हैं। हाइपोथायरॉइडिज्म में इस तरह के बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

यदि बालों और त्वचा से जुड़ी समस्या के साथ थकान, वजन बढ़ना, कब्ज या ठंड अधिक लगने जैसी शिकायतें भी लंबे समय से हैं, तो चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

अगर ये लक्षण कई सप्ताह से बने हुए हैं, लगातार बढ़ रहे हैं या आपकी रोजमर्रा की गतिविधियों को प्रभावित कर रहे हैं, तो डॉक्टर से सलाह लें। जरूरत पड़ने पर चिकित्सक थायरॉइड हार्मोन की जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।

गर्दन में सूजन या गांठ, निगलने में परेशानी, सांस लेने में दिक्कत, बहुत तेज या अनियमित धड़कन जैसी समस्या होने पर जांच में देरी नहीं करनी चाहिए।

ध्यान रखें: थकान, वजन में बदलाव या बाल झड़ना अपने आप में थायरॉइड बीमारी की पुष्टि नहीं करते। सही कारण जानने के लिए चिकित्सकीय जांच और डॉक्टर की सलाह जरूरी है।

नोट: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। किसी भी बीमारी का निदान या इलाज केवल चिकित्सकीय सलाह के आधार पर ही किया जाना चाहिए।

(साभार)